शिवानी जायसवाल ,अमेरिका - मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और चीन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। दोनों देशों ने साफ संदेश दिया है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। वैश्विक राजनीति में अक्सर अलग-अलग विचार रखने वाले अमेरिका और चीन का इस मुद्दे पर एकमत होना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी घटना माना जा रहा है।
हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बातचीत में दोनों देशों के नेताओं ने परमाणु हथियारों के खतरे पर चिंता जताई। उनका कहना है कि अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल करता है तो इससे केवल मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से अब कूटनीतिक दबाव बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
ईरान पहले भी कई बार कह चुका है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा और वैज्ञानिक शोध के लिए है। हालांकि पश्चिमी देश लंबे समय से इस दावे पर सवाल उठाते रहे हैं। अमेरिका का मानना है कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश कर सकता है, जबकि चीन अब तक संतुलित नीति अपनाता रहा है। लेकिन इस बार चीन का सख्त बयान दुनिया का ध्यान खींच रहा है।
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