शिवानी जायसवाल , अमेरिका - ईरान के खिलाफ अमेरिका ने एक बार फिर सख्त कदम उठाया है। अमेरिका ने चीन, हांगकांग, यूएई और ओमान की कई कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। आरोप है कि ये कंपनियां चोरी-छिपे ईरान का तेल खरीदने और उसे दूसरे देशों तक पहुंचाने में मदद कर रही थीं।
अमेरिकी सरकार का कहना है कि ईरान तेल बेचकर बड़ी कमाई कर रहा है और इसी पैसे का इस्तेमाल हथियार तथा सैन्य गतिविधियों में किया जा सकता है। इसी वजह से उन कंपनियों को निशाने पर लिया गया जो ईरान के तेल कारोबार से जुड़ी हुई थीं।
प्रतिबंध लगने के बाद इन कंपनियों के लिए अमेरिका से व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा। उनकी अमेरिकी संपत्तियां जब्त की जा सकती हैं और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन पर भी असर पड़ सकता है। माना जा रहा है कि इस फैसले से वैश्विक तेल बाजार में हलचल बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस कदम का असर अमेरिका और चीन के रिश्तों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि चीन लंबे समय से ईरानी तेल खरीदता रहा है। दूसरी तरफ ईरान ने हमेशा की तरह अमेरिकी प्रतिबंधों को दबाव बनाने की राजनीति बताया है।
दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि क्या इन प्रतिबंधों से ईरान का तेल कारोबार प्रभावित होगा या फिर नए रास्तों से व्यापार जारी रहेगा।
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