पोलैंड में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन के दौरान ताइवान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि यूक्रेन रूस के खिलाफ युद्ध में हार जाता है, तो इसका सीधा असर एशिया पर पड़ेगा और चीन ताइवान पर आक्रामक कदम उठाने के लिए और अधिक साहसिक हो सकता है।
अधिकारी ने कहा कि ताइवान पहले से ही पिछले पाँच वर्षों से चीन के दबाव में है। बीजिंग ने न केवल सैन्य अभ्यासों के जरिए दबाव बनाया है, बल्कि "ग्रे जोन" रणनीतियों के तहत साइबर हमले, पानी के भीतर संचार केबलों को नुकसान पहुँचाना और अन्य गैर-प्रत्यक्ष तरीकों का उपयोग करके ताइवान की सुरक्षा को लगातार चुनौती दी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि रूस यूक्रेन पर जीत हासिल करता है, तो यह बीजिंग को यह संदेश देगा कि बल प्रयोग एक सफल रणनीति हो सकती है। इससे ताइवान के खिलाफ चीन के सैन्य कदम उठाने की संभावना और भी बढ़ जाएगी।
इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह दर्शाता है कि एक क्षेत्र में चल रहे संघर्ष का प्रभाव वैश्विक संतुलन और रणनीतिक फैसलों पर पड़ सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि ताइवान यूक्रेन की लड़ाई को चेतावनी के तौर पर देखता है। यदि लोकतांत्रिक देश यूक्रेन के समर्थन में एकजुट और निर्णायक नहीं रहते, तो यह दुनिया में आक्रामक ताकतों को गलत संदेश दे सकता है और क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल सकता है।
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