रविवार सुबह की पहली किरण से पहले बंगाल भर में एक अनूठा आलाप गूंज उठा। महालया की सुबह 4 बजे, हजारों बंगाली वंचित नींद छोड़कर रेडियो के पास आकर ‘महिषासुर मर्दिनी’ सुनने लगे – बिरेंद्र कृष्ण भद्रा की सशक्त वाणी में देवी की कथा और श्लोक-गायन जिसने दशकों से पंडालों और घरों में पवित्रता भर दी है।कोलकाता के हुगली तट पर, खासकर दाक्षिणेश्वर घाट पर भक्तों का हुजूम इकठ्ठा हुआ ‘तर्पण’ अर्पित करने। वहीं तमिलनाडु के रामेश्वरम में अग्नि तीर्थम् में भी श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान और पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित की। ‘तर्पण’ उस प्राचीन रस्म का हिस्सा है जिसमें जल अर्पित कर पूर्वजों की आत्मा की शांति और आशिर्वाद की कामना होती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर लोगों को “शुभ महालया” की बधाई दी। उनके संदेश में देवी दुर्गा की कृपा, जीवन में उजाला, उद्देश्य और अटूट आनंद की कामना शामिल थी। ऐसे समय में जब देवी पूजा का आरंभिक उत्साह महालया से ही शुरू हो जाता है, पीएम की शुभकामनाएँ एक तरह से त्योहार की सामाजिक भावना को और पक्का करती हैं।पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस मौके पर एक नया पूजा-गीत साझा किया, जिसे उन्होंने स्वयं लिखा और रचा है। उनका संदेश “तन, अगमणि और अभान” के साथ लोगों के दिलों तक महालय की शुभकामनाएँ पहुंचाने का माध्यम बना।
महालया सिर्फ पूजा-उत्सव की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह उन पलों की याद दिलाता है जब हम पूर्वजों को याद करते हैं, शुभ कर्मों के लिए मन को तैयार करते हैं और देवी दुर्गा की शक्ति के स्वागत के लिए आत्मा को जगाते हैं। इस प्राचीन परंपरा की धुन इस वर्ष भी हवाओं में गूंज रही है, हर दिल में उम्मीद जगाती।
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इस कदम से भारतीय निर्यातों पर भारी दबाव पड़ा है।
उन्होंने यह भी साझा किया कि पंजाबी भाषा सीखने का उनका अनुभव बेहद प्रेरणादायक रहा...
जाँच से पता चला है कि घटना मंगलवार रात हुई थी।
सौभाग्य से इस घटना में सभी यात्री और क्रू सदस्य पूरी तरह सुरक्षित रहे