बंग्लुरु में सोमवार को रेल विभाग द्वारा गंधीनगर स्थित देसी मसाला होटल में आयोजित किए जाने वाले हिंदी दिवस कार्यक्रम को कर्नाटक रक्षा वेदी की महिलाओं ने विरोध के बाद रद्द करवा दिया। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व संगठन की राज्य अध्यक्ष टी ए नारायणगोवडा द्वारा किया गया। हिंदी दिवस वह दिन है जब 14 सितंबर 1949 को भारत की संविधान सभा ने हिन्दी को एक सरकारी भाषा के रूप में अपनाने की घोषणा की थी। इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्राम्य और शहरी दोनों स्तरों पर हिन्दी को बढ़ावा देने की कोशिश की जाती है।
हिंदी दिवस वह दिन है जब 14 सितंबर 1949 को भारत की संविधान सभा ने हिन्दी को एक सरकारी भाषा के रूप में अपनाने की घोषणा की थी। इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्राम्य और शहरी दोनों स्तरों पर हिन्दी को बढ़ावा देने की कोशिश की जाती है। प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर बहुसंख्यक प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ लोगों ने कहा कि हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए संसाधन अधिक मिलते हैं जबकि क्षेत्रीय भाषाएँ संघर्ष कर रही हैं। एक पोस्ट ने लिखा कि “भाषा शक्ति और नियंत्रण की बात है; हिंदी दिवस जश्न नहीं बल्कि क्षेत्रीय भाषाओं और सांस्कृतिक पहचान के खिलाफ युद्ध का आह्वान है।” वहीं कुछ अन्य ने भाषा को लेकर लड़ाई को विभाजनकारी बताया और शांति व संयम बरतने की सलाह दी
इस घटना ने कर्नाटक में भाषा राजनीति की संवेदनशीलता को फिर उजागर कर दिया है, जहां कन्नड़ भाषा की रक्षा और हिंदी अधिप्राप्ति के बीच अक्सर टकराव होता रहा है। KaRavE जैसे संगठन कन्नड़ भाषा के पक्ष में सक्रिय रहते हैं, और उन्हें लगता है कि राज्य में स्थानीय भाषा की प्राथमिकता होनी चाहिए।
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इस कदम से भारतीय निर्यातों पर भारी दबाव पड़ा है।
उन्होंने यह भी साझा किया कि पंजाबी भाषा सीखने का उनका अनुभव बेहद प्रेरणादायक रहा...
जाँच से पता चला है कि घटना मंगलवार रात हुई थी।
सौभाग्य से इस घटना में सभी यात्री और क्रू सदस्य पूरी तरह सुरक्षित रहे