कानपुर के देवनगर इलाके में शनिवार को एक ऐसे मामले का खुलासा हुआ जिसने सबको हैरान कर दिया। 49 वर्षीय मजदूर किशन मोहन शुक्ला की लाश उसके घर के कमरे में लगभग पांच-छह दिन बाद पाई गई, जबकि उसके बड़े भाई और भतीजा उसी मकान की ऊपरी मंजिल पर रहते थे, लेकिन उन्हें इस बात की जानकारी नहीं हुई।करीब एक हफ्ते तक घर से बदबू आने लगी, जो किरायेदारों ने महसूस की। इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस पहुँचने पर उन्होंने दरवाजा तोड़ कर अंदर देखा और किशन की लाश बरामद की गई। शुरुआती जांच में पता चला कि किशन पिछले कुछ समय से मानसिक विकार से पीड़ित थे और अकेले रहते थे क्योंकि वे अविवाहित थे। उनके माता-पिता कुछ साल पहले ही स्वर्गवासी हो चुके हैं।
पोस्टमॉर्टम से पहले उनकी लाश की विषैले अंगों (viscera) को जांच के लिए भेजा गया है और मृत्यु के सटीक कारण की पुष्टि के लिए चिकित्सा जांच (autopsy) निर्धारित की गई है।
किशन की बहन, उषा, ने आरोप लगाया है कि न तो भाई की देखभाल की गई, न ही किसी ने जांच की इस दौरान कि वो ठीक है या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका मकान, जो उनकी माँ के नाम था, बड़े भाई अच्युत शुक्ला ने दूसरे मंजिल पर रहते हुए -- संभवत: उनका इजाज़त चुपचाप बेच दिया। इस पर भी जांच की जा रही है।
यह मामला इससे संकेत देता है कि परिवार और पड़ोसियों की लापरवाही व सामाजिक अलगाव किस तरह घातक परिणाम ला सकते हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मृत्यु अचानक हुई थी या कोई बाहरी कारण शामिल था। कानपुर पुलिस ने आश्वस्त किया है कि मामले की गहराई से जांच की जाएगी और यदि किसी तरह की लापरवाही पाई गई, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
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इस कदम से भारतीय निर्यातों पर भारी दबाव पड़ा है।
उन्होंने यह भी साझा किया कि पंजाबी भाषा सीखने का उनका अनुभव बेहद प्रेरणादायक रहा...
जाँच से पता चला है कि घटना मंगलवार रात हुई थी।
सौभाग्य से इस घटना में सभी यात्री और क्रू सदस्य पूरी तरह सुरक्षित रहे