मध्यप्रदेश में एक जमानत मृत्यु (custodial death) मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की जमकर फटकार लगाई है। अदालत ने उनके द्वारा दो पुलिसकर्मियों को निलंबित करने में विलंब को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। ये अधिकारी अप्रैल 2025 से फरार थे, और केवल 24 सितंबर 2025 को ही उन्हें निलंबित किया गया, जिससे न्यायालय ने अधिकारियों की न्याय व्यवस्था में गंभीरता पर सवाल उठाए।
मामला 24 वर्षीय व्यक्ति की पुलिस हिरासत में हुई मृत्यु से संबंधित है। मई 2025 में इस मामले की जांच CBI को सौंप दी गई थी। मृतक के परिवार, विशेष रूप से उनकी माता, ने अदालत में अवज्ञा याचिका दायर की और आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बी.वी. नगरत्ना और आर. महादेवन की बेंच ने कहा, “आप कहते हैं कि वे अप्रैल से फरार हैं। इसका मतलब है कि आप उनकी सुरक्षा कर रहे हैं। यह वास्तव में अवमानना है।” CBI ने अदालत को सूचित किया कि अधिकारियों का पता लगाने के लिए वित्तीय लेन-देन और वाहनों के माध्यम से कई प्रयास किए गए, लेकिन वे सफल नहीं रहे।
सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार और CBI को विलंब का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और चेतावनी दी कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिले तो अदालत अवमानना कार्यवाही कर सकती है।
यह मामला पुलिस हिरासत में मौत और न्याय प्रणाली में त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर गहन ध्यान आकर्षित करता है और राज्य प्रशासन की जवाबदेही को उजागर करता है।
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