शिवानी जायसवाल , ईरान - ईरान में चल रहे युद्ध का असर अब सिर्फ उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरी दुनिया की खाद्य व्यवस्था पर पड़ने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले समय में करोड़ों लोगों के लिए खाना जुटाना मुश्किल हो सकता है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, हर हफ्ते अरबों लोगों के भोजन पर असर पड़ सकता है।
इस समस्या की मुख्य वजह उर्वरक (खाद) की कमी है। खेती के लिए उर्वरक बहुत जरूरी होता है, क्योंकि इससे फसल की पैदावार बढ़ती है। लेकिन युद्ध के कारण उर्वरक की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर तनाव बढ़ने से कई देशों तक खाद और कच्चा माल पहुंचने में दिक्कत आ रही है।
उर्वरक की कमी का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। कई किसान महंगे दामों के कारण कम खाद खरीद रहे हैं या बिल्कुल नहीं खरीद पा रहे। इससे फसलों की गुणवत्ता और मात्रा दोनों पर असर पड़ सकता है। अनुमान है कि उत्पादन में 30% से 50% तक की गिरावट आ सकती है, जो आने वाले समय में बड़े खाद्य संकट का कारण बन सकती है।
इसके अलावा, उर्वरक की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि और सप्लाई में रुकावट के कारण खेती की लागत बढ़ गई है। छोटे किसानों के लिए यह स्थिति और भी कठिन हो गई है, क्योंकि उनके पास सीमित संसाधन होते हैं।
इस संकट का सबसे ज्यादा असर गरीब और विकासशील देशों पर पड़ेगा। अमीर देश किसी तरह ऊंची कीमत देकर उर्वरक खरीद सकते हैं, लेकिन गरीब देशों के किसान ऐसा नहीं कर पाएंगे। इससे दुनिया में असमानता और भूख की समस्या और गहरी हो सकती है। फिलहाल कुछ देशों के पास अनाज का भंडार मौजूद है, जिससे तुरंत संकट नहीं दिख रहा।
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि असली असर आने वाले महीनों में सामने आएगा, जब नई फसलें कम होंगी। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बेहद जरूरी है। सरकारों को चाहिए कि वे किसानों को सहायता दें, उर्वरक की सप्लाई सुनिश्चित करें और खाद्य भंडारण को मजबूत करें, ताकि आने वाले संकट को टाला जा सके।
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उन्होंने यह भी साझा किया कि पंजाबी भाषा सीखने का उनका अनुभव बेहद प्रेरणादायक रहा...
जाँच से पता चला है कि घटना मंगलवार रात हुई थी।
सौभाग्य से इस घटना में सभी यात्री और क्रू सदस्य पूरी तरह सुरक्षित रहे