शिवानी जायसवाल , वॉशिंगटन - अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी और तेज हो गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस स्थिति में नाटो देशों से उन्हें कोई खास मदद नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि कई सहयोगी देशों ने इस संकट में दूरी बनाए रखी है। ट्रंप के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस और तेज हो गई है। इस बीच ईरान को लेकर उनकी टिप्पणियों ने भी नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने ईरान को लेकर कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया है।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपने दम पर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने नाटो देशों के रवैये को निराशाजनक बताया और कहा कि सहयोगी देशों को ज्यादा सक्रिय होना चाहिए था। उनके अनुसार, वैश्विक सुरक्षा के मुद्दों पर सभी देशों को साथ आकर काम करना चाहिए। हालांकि कई देशों ने इस पर अलग राय रखी है और बातचीत पर जोर दिया है। नाटो के कुछ सदस्य देश सीधे सैन्य हस्तक्षेप से बचने की नीति अपना रहे हैं। इससे अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच मतभेद बढ़ते दिख रहे हैं।
दूसरी ओर, ईरान के साथ तनाव के कारण पश्चिम एशिया में हालात संवेदनशील बने हुए हैं। कई इलाकों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। तेल और व्यापार मार्गों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव बढ़ा तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर अमेरिका, नाटो और ईरान के बीच बयानबाज़ी और तनाव लगातार बढ़ रहा है। कूटनीतिक स्तर पर समाधान की कोशिशें जारी हैं, लेकिन स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बड़ी राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है।
इस कदम से भारतीय निर्यातों पर भारी दबाव पड़ा है।
उन्होंने यह भी साझा किया कि पंजाबी भाषा सीखने का उनका अनुभव बेहद प्रेरणादायक रहा...
जाँच से पता चला है कि घटना मंगलवार रात हुई थी।
सौभाग्य से इस घटना में सभी यात्री और क्रू सदस्य पूरी तरह सुरक्षित रहे