संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि वैश्विक वर्कफोर्स (Global Workforce) आज की हकीकत है और इसे नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि दुनिया को एक ऐसा मॉडल तैयार करना होगा जो अधिक निष्पक्ष, समकालीन और प्रभावी हो, ताकि वैश्विक जनसांख्यिकी और आर्थिक जरूरतों को पूरा किया जा सके।
जयशंकर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने एच-1बी वीज़ा प्रणाली में बड़े बदलाव किए हैं। नई नीतियों के तहत एच-1बी वीज़ा की फाइलिंग फीस में वृद्धि की गई है और लॉटरी प्रणाली को बदलकर ऐसे आवेदकों को प्राथमिकता दी गई है जिन्हें अधिक वेतन की पेशकश की गई हो। यह बदलाव भारतीय आईटी पेशेवरों को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा, क्योंकि एच-1बी वीज़ा पाने वालों में 71% से अधिक भारतीय होते हैं।
जयशंकर ने सीधे तौर पर अमेरिकी नीतियों का नाम नहीं लिया, लेकिन संकेत दिया कि व्यापार, टैरिफ और इमिग्रेशन पॉलिसी जैसी चुनौतियां आपस में जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक कार्यबल की लोकेशन पर राजनीतिक विवाद हो सकते हैं, लेकिन इसे रोकना संभव नहीं है क्योंकि दुनिया की बढ़ती आर्थिक जरूरतें और बदलते जनसांख्यिकीय आंकड़े इसे आगे बढ़ा रहे हैं।
इसके साथ ही, उन्होंने भारत के आत्मनिर्भरता अभियान (Self-Reliance) पर जोर दिया। जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल के समय में हर देश को अपनी आंतरिक क्षमताओं को मजबूत करना जरूरी है, ताकि बाहरी संकटों का बेहतर तरीके से सामना किया जा सके।
उनका यह बयान भारतीय पेशेवरों और टैक्स सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण संदेश है, क्योंकि अमेरिकी नीतियों में बदलाव से कई भारतीयों के वीज़ा और करियर पर असर पड़ सकता
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