शिवानी जायसवाल , अफगानिस्तान - अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा लागू किए गए नए विवाह कानून को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस कानून में नाबालिग लड़कियों की शादी से जुड़े नियमों को लेकर कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है। आलोचकों का कहना है कि यह फैसला लड़कियों के अधिकारों, शिक्षा और उनके भविष्य के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
तालिबान प्रशासन का कहना है कि नया कानून इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार बनाया गया है, लेकिन वैश्विक समुदाय इसे महिलाओं और बच्चियों की स्वतंत्रता पर एक और सख्त प्रतिबंध के रूप में देख रहा है। संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने कहा है कि कम उम्र में शादी से लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक विकास पर गहरा असर पड़ता है।
मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि तालिबान के सत्ता में आने के बाद से अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों के अधिकार लगातार सीमित किए जा रहे हैं। पहले ही लड़कियों की उच्च शिक्षा, कई नौकरियों और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी पर पाबंदियां लगाई जा चुकी हैं। अब नए विवाह कानून ने अंतरराष्ट्रीय चिंता को और बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र में शादी की अनुमति से बाल विवाह के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे हजारों लड़कियों का भविष्य प्रभावित होगा। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे “मानवाधिकारों के खिलाफ कदम” बताते हुए तालिबान से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है।
दूसरी ओर, तालिबान सरकार अपने फैसलों का बचाव कर रही है और कह रही है कि देश के कानून स्थानीय संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तय किए जा रहे हैं। हालांकि, पश्चिमी देशों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने साफ किया है कि महिलाओं के अधिकारों पर बढ़ती पाबंदियां अफगानिस्तान के वैश्विक संबंधों और आर्थिक सहायता पर असर डाल सकती हैं।
इस मुद्दे पर दुनिया भर में बहस तेज हो गई है। कई देशों ने अफगान महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की बात कही है। आने वाले समय में यह मामला वैश्विक कूटनीति और मानवाधिकार एजेंडे का अहम मुद्दा बन सकता है।
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