शिवानी जायसवाल , लखनऊ - राजधानी लखनऊ में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन को लेकर पुलिस प्रशासन ने CJP (सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस) को अनुमति देने से इनकार कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संगठन ने शहर में धरना-प्रदर्शन आयोजित करने की अनुमति मांगी थी। आवेदन की समीक्षा के बाद संबंधित एजेंसियों से प्राप्त रिपोर्टों और सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर विचार किया गया। इसके बाद प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति न देने का फैसला लिया।
अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में बड़े सार्वजनिक जमावड़े से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और शांति व्यवस्था बनाए रखने में चुनौती उत्पन्न हो सकती है। इसी आधार पर अनुमति आवेदन को स्वीकृति नहीं दी गई।
CJP से जुड़े प्रतिनिधियों ने प्रशासन के फैसले पर असहमति जताई है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है और उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। संगठन ने इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग भी की है।
इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोगों ने प्रशासन के निर्णय का समर्थन करते हुए इसे सुरक्षा के लिहाज से आवश्यक बताया है, जबकि अन्य ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा विषय बताया है।
पुलिस और प्रशासन की ओर से शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता बढ़ा दी गई है। मामले पर आगे की स्थिति संगठन और प्रशासन के बीच होने वाली बातचीत के बाद स्पष्ट हो सकेगी।
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इस कदम से भारतीय निर्यातों पर भारी दबाव पड़ा है।
उन्होंने यह भी साझा किया कि पंजाबी भाषा सीखने का उनका अनुभव बेहद प्रेरणादायक रहा...
जाँच से पता चला है कि घटना मंगलवार रात हुई थी।
सौभाग्य से इस घटना में सभी यात्री और क्रू सदस्य पूरी तरह सुरक्षित रहे