शिवानी जायसवाल , जिनेवा - विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कांगो और युगांडा में फैल रहे इबोला वायरस संक्रमण को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए इसे स्वास्थ्य आपातकाल (Health Emergency) घोषित कर दिया है। लगातार बढ़ते संक्रमण और सीमावर्ती क्षेत्रों में वायरस के फैलने के खतरे को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DR Congo) के कई इलाकों में इबोला संक्रमण के नए मामले सामने आए हैं, जबकि पड़ोसी देश युगांडा में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही अधिक होने के कारण संक्रमण तेजी से फैलने का खतरा बना हुआ है।
स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमों को तैनात किया गया है और संक्रमित मरीजों की पहचान के साथ-साथ निगरानी अभियान तेज कर दिया गया है। साथ ही, सीमाओं पर स्वास्थ्य जांच और आपात चिकित्सा सुविधाओं को भी मजबूत किया जा रहा है।
WHO ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते संक्रमण पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह संकट व्यापक रूप ले सकता है। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग, वैक्सीन सपोर्ट और मेडिकल संसाधनों को तत्काल बढ़ाने की अपील की है।
इबोला एक बेहद खतरनाक और जानलेवा वायरस है, जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, कमजोरी, शरीर में दर्द और गंभीर रक्तस्राव शामिल हैं। अफ्रीकी देशों में पहले भी इबोला के कई बड़े प्रकोप सामने आ चुके हैं, जिनमें हजारों लोगों की जान गई थी।
WHO और स्थानीय सरकारें मिलकर स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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इस कदम से भारतीय निर्यातों पर भारी दबाव पड़ा है।
उन्होंने यह भी साझा किया कि पंजाबी भाषा सीखने का उनका अनुभव बेहद प्रेरणादायक रहा...
जाँच से पता चला है कि घटना मंगलवार रात हुई थी।
सौभाग्य से इस घटना में सभी यात्री और क्रू सदस्य पूरी तरह सुरक्षित रहे