साने ताकाइची (Sanae Takaichi) जापान की राजनीति में इतिहास रचने वाली हैं, क्योंकि वे देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के नेतृत्व का चुनाव जीत लिया है, जिससे उनके प्रधानमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस उपलब्धि के बावजूद जापान की कई महिलाएं उनके नेतृत्व को लेकर उत्साहित नहीं हैं।
64 वर्षीय ताकाइची ने यह वादा किया है कि वे अपनी कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाएंगी। फिर भी, उनका राजनीतिक रुख काफी रूढ़िवादी माना जाता है। उन्होंने पहले जेंडर इक्वालिटी (लैंगिक समानता) से जुड़ी कई सुधार योजनाओं का विरोध किया है और समलैंगिक विवाह को मान्यता देने के खिलाफ रहीं हैं। ताकाइची पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों की समर्थक हैं और महिलाओं की भूमिका को मुख्य रूप से “पत्नी और मां” के रूप में देखने के लिए जानी जाती हैं।
आलोचकों का मानना है कि ताकाइची पार्टी के पुरुष प्रभुत्व वाले नेतृत्व की “वफादार” सदस्य हैं, इसलिए उनसे प्रगतिशील बदलाव की उम्मीद कम है। जापान में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बेहद सीमित है — संसद के निचले सदन में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 15 प्रतिशत है और देश के 47 प्रांतों में से सिर्फ दो में महिला गवर्नर हैं।
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