शिवानी जायसवाल , नई दिल्ली - केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने संकेत दिए हैं कि वर्ष 2027 से NEET परीक्षा को कंप्यूटर आधारित यानी ऑनलाइन मोड में आयोजित किया जा सकता है। इस बदलाव का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और आधुनिक बनाना बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी में जुटे हैं। यदि यह फैसला लागू होता है, तो देशभर के छात्र निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर कंप्यूटर के माध्यम से परीक्षा देंगे। सरकार का मानना है कि ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली अपनाने से पेपर लीक और गड़बड़ियों जैसी समस्याओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी। साथ ही, परिणाम जारी करने की प्रक्रिया भी पहले से तेज हो जाएगी।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई छात्रों का कहना है कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले अभ्यर्थियों के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा नई चुनौती बन सकती है, क्योंकि वहां तकनीकी सुविधाएं और डिजिटल अभ्यास की कमी है। दूसरी ओर, शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते समय के साथ परीक्षा प्रणाली को तकनीक से जोड़ना जरूरी है।
फिलहाल सरकार की ओर से अंतिम दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन आने वाले समय में छात्रों के लिए मॉक टेस्ट और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं, ताकि वे नई परीक्षा प्रणाली के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
शिवानी जायसवाल, नई दिल्ली- केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने संकेत दिए हैं कि वर्ष 2027 से NEET परीक्षा को कंप्यूटर आधारित यानी ऑनलाइन मोड में आयोजित किया जा सकता है। इस बदलाव का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और आधुनिक बनाना बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी में जुटे हैं। यदि यह फैसला लागू होता है, तो देशभर के छात्र निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर कंप्यूटर के माध्यम से परीक्षा देंगे। सरकार का मानना है कि ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली अपनाने से पेपर लीक और गड़बड़ियों जैसी समस्याओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी। साथ ही, परिणाम जारी करने की प्रक्रिया भी पहले से तेज हो जाएगी।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई छात्रों का कहना है कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले अभ्यर्थियों के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा नई चुनौती बन सकती है, क्योंकि वहां तकनीकी सुविधाएं और डिजिटल अभ्यास की कमी है। दूसरी ओर, शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते समय के साथ परीक्षा प्रणाली को तकनीक से जोड़ना जरूरी है।
फिलहाल सरकार की ओर से अंतिम दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन आने वाले समय में छात्रों के लिए मॉक टेस्ट और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं, ताकि वे नई परीक्षा प्रणाली के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
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इस कदम से भारतीय निर्यातों पर भारी दबाव पड़ा है।
उन्होंने यह भी साझा किया कि पंजाबी भाषा सीखने का उनका अनुभव बेहद प्रेरणादायक रहा...
जाँच से पता चला है कि घटना मंगलवार रात हुई थी।
सौभाग्य से इस घटना में सभी यात्री और क्रू सदस्य पूरी तरह सुरक्षित रहे