शिवानी जायसवाल , नई दिल्ली - भारत की ऐतिहासिक धरोहर को एक बड़ी सफलता मिली है। नीदरलैंड्स सरकार ने 11वीं सदी की दुर्लभ चोलकालीन ताम्रपट्टियां भारत को आधिकारिक रूप से वापस सौंप दी हैं। ये ताम्रपट्टियां सदियों पुरानी भारतीय संस्कृति, प्रशासन और मंदिर व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों का स्रोत मानी जाती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ये ताम्रपट्टियां तमिलनाडु के चोल साम्राज्य के शासनकाल से संबंधित हैं, जिनमें उस दौर के दान, भूमि अनुदान और सामाजिक व्यवस्था का उल्लेख दर्ज है। लंबे समय से विदेश में मौजूद इन धरोहरों की वापसी को भारत की सांस्कृतिक कूटनीति की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
भारतीय अधिकारियों ने कहा कि यह कदम केवल प्राचीन वस्तुओं की वापसी नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता और इतिहास के प्रति वैश्विक सम्मान का प्रतीक है। इतिहासकारों का मानना है कि इन ताम्रपट्टियों के अध्ययन से दक्षिण भारत के मध्यकालीन इतिहास को और बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
भारत और नीदरलैंड्स के बीच सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में यह फैसला अहम माना जा रहा है। जल्द ही इन ताम्रपट्टियों को भारत के किसी प्रमुख संग्रहालय में संरक्षित किया जाएगा|
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इस कदम से भारतीय निर्यातों पर भारी दबाव पड़ा है।
उन्होंने यह भी साझा किया कि पंजाबी भाषा सीखने का उनका अनुभव बेहद प्रेरणादायक रहा...
जाँच से पता चला है कि घटना मंगलवार रात हुई थी।
सौभाग्य से इस घटना में सभी यात्री और क्रू सदस्य पूरी तरह सुरक्षित रहे